मामका विचाराः
मम मस्तिष्के जीवने च यत् प्रचलति तत् संस्कृतेन लिखितमत्र।
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रविवार, 30 दिसंबर 2018
गृञ्जनकलायः
अद्य बहोः कालस्यानन्तरङ्गृञ्जनकलायमघसम्। बाल्यकाले माता भोजनाय तत्पचति स्म। भार्या प्रथमकृत्वोऽपाक्षीत्। नैशाहारस्तया संस्कृतः। जग्ध्वा महान्तं सन्तोषमप्रापम्।
1 टिप्पणी:
Rajeev Nandan Dwivedi kahdoji
19 अगस्त 2026 को 4:29 pm बजे
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